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mahabharat 2.31.d55: घटोत्कच बोला- महाराज! चंद्रवंश में पांडु नाम के एक पराक्रमी राजा हुए हैं। उनके पाँच पुत्र हैं, जो इंद्र के समान पराक्रमी हैं। उनमें सबसे बड़े का नाम धर्मपुत्र है।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.31.d55 
घटोत्कच उवाच
सोमस्य वंशे राजाऽऽसीत् पाण्डुर्नाम महाबल:।
पाण्डो: पुत्राश्च पञ्चासञ्छक्रतुल्यपराक्रमा:॥
तेषां ज्येष्ठस्तु नाम्नाभूद् धर्मपुत्र इति श्रुत:।
 
 
अनुवाद
घटोत्कच बोला- महाराज! चंद्रवंश में पांडु नाम के एक पराक्रमी राजा हुए हैं। उनके पाँच पुत्र हैं, जो इंद्र के समान पराक्रमी हैं। उनमें सबसे बड़े का नाम धर्मपुत्र है।
 
Ghatotkacha said— Maharaj! There is a mighty king named Pandu in the Chandravansh. He has five sons, who are as powerful as Indra. The eldest among them is known as Dharmaputra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)