Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.31.d51: और जिस प्रकार महाबली चित्ररथ इन्द्र के समक्ष विनीत भाव से रहते हैं, उसी प्रकार महाबली घटोत्कच भी विनीत भाव से उनके समक्ष खड़े हो गए। दूत को आते देख राक्षसराज विभीषण ने उनका यथोचित आदर किया और सान्त्वनापूर्ण वचन बोले। | mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
और जिस प्रकार महाबली चित्ररथ इन्द्र के समक्ष विनीत भाव से रहते हैं, उसी प्रकार महाबली घटोत्कच भी विनीत भाव से उनके समक्ष खड़े हो गए। दूत को आते देख राक्षसराज विभीषण ने उनका यथोचित आदर किया और सान्त्वनापूर्ण वचन बोले।
And just as the mighty Chitraratha remains humble in front of Indra, similarly the mighty Ghatotkacha also stood before him with humility. Seeing the messenger coming, the demon king Vibhishan gave him due respect and spoke in consoling words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥