स श्रुत्वा मधुरं शब्दं प्रीतिमानभवत् तदा।
ततो विगाह्य हैडिम्बो बहुकक्षां मनोरमाम्॥
स ददर्श महात्मानं द्वा:स्थेन भरतर्षभ।
तं विभीषणमासीनं काञ्चने परमासने॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उन मधुर वचनों को सुनकर घटोत्कच को बड़ी प्रसन्नता हुई। वह अनेक सुन्दर कक्षों को पार करके द्वारपाल के साथ गया और वहाँ महात्मा विभीषण को एक सुन्दर स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान देखा।
O best of the Bharatas! Ghatotkacha felt very happy on hearing those sweet words. He crossed many beautiful rooms and went with the gatekeeper and saw Mahatma Vibhishan sitting on a beautiful golden throne.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)