Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.31.d39-d40: विचित्र मालाओं से सुसज्जित तथा शुद्ध स्वर्ण की वेदियों से विभूषित वह राजमहल अत्यन्त सुन्दर प्रतीत हो रहा था। उस महल की इन सब सुन्दर विशेषताओं को देखकर घटोत्कचना ने जैसे ही भीतर प्रवेश किया, उसके कानों में मृदंग की मधुर ध्वनि सुनाई दी। | mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विचित्र मालाओं से सुसज्जित तथा शुद्ध स्वर्ण की वेदियों से विभूषित वह राजमहल अत्यन्त सुन्दर प्रतीत हो रहा था। उस महल की इन सब सुन्दर विशेषताओं को देखकर घटोत्कचना ने जैसे ही भीतर प्रवेश किया, उसके कानों में मृदंग की मधुर ध्वनि सुनाई दी।
That royal palace, decorated with strange garlands and adorned with pure gold altars, looked very beautiful. Seeing all these beautiful features of that palace, as soon as Ghatotkachna entered inside, he heard the sweet sound of Mridanga in his ears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥