श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d32
 
 
श्लोक  2.31.d32 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा द्वारपालो महीपते।
तथेत्युक्त्वा विवेशाथ भवनं स निवेदक:॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! घटोत्कच के वचन सुनकर द्वारपाल ने 'बहुत अच्छा' कहकर सूचना देने के लिए महल के अन्दर चला गया।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing Ghatotkacha's words, the gatekeeper said 'very good' and went inside the palace to give the information.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)