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mahabharat 2.31.d2: राजा जनमेजय! उन सबकी बात मानकर माद्रीकुमार को तुरन्त अपने भतीजे राक्षसराज घटोत्कच का स्मरण हो आया।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  2.31.d2 
अनुमान्य स तां राजन् सहदेवस्त्वरान्वित:।
चिन्तयामास राजेन्द्र भ्रातु: पुत्रं घटोत्कचम्॥
 
 
अनुवाद
राजा जनमेजय! उन सबकी बात मानकर माद्रीकुमार को तुरन्त अपने भतीजे राक्षसराज घटोत्कच का स्मरण हो आया।
 
King Janamejaya! Respecting the opinion of all of them, Madrikumar immediately thought of his nephew, the demon king Ghatotkacha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)