श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d11-d12
 
 
श्लोक  2.31.d11-d12 
सहदेव उवाच
गच्छ लङ्कां पुरीं वत्स करार्थं मम शासनात्।
तत्र दृष्ट्वा महात्मानं राक्षसेन्द्रं विभीषणम्॥
रत्नानि राजसूयार्थं विविधानि बहूनि च।
उपादाय च सर्वाणि प्रत्यागच्छ महाबल॥
 
 
अनुवाद
सहदेव ने कहा- पुत्र! तुम मेरी आज्ञा के अनुसार कर लेने के लिए लंकापुरी जाओ और वहाँ राक्षसराज विभीषण से मिलकर राजसूय यज्ञ के लिए नाना प्रकार के रत्न प्राप्त करो। हे पराक्रमी! उनसे दान में प्राप्त समस्त वस्तुएँ लेकर शीघ्र ही यहाँ लौट आओ।
 
Sahadeva said- Son! You go to Lankapuri to collect taxes as per my orders and meet the demon king Vibhishan there and obtain many gems of various kinds for the Rajasuya Yagna. O mighty warrior! Take all the things received as gifts from him and return here soon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)