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mahabharat 2.31.d1: वहाँ से समुद्र के किनारे पहुँचकर पाण्डवपुत्र सहदेव ने अपनी सेना का पड़ाव डाला। भरत! तत्पश्चात् महाबाहु सहदेव अपने सचिवों के साथ, जो अत्यन्त बुद्धिमान् परामर्श देने में कुशल थे, बैठकर बहुत देर तक विचार करते रहे।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.31.d1 
(समुद्रतीरमासाद्य न्यविशत् पाण्डुनन्दन:।
सहदेवस्ततो राजन् मन्त्रिभि: सह भारत।
सम्प्रधार्य महाबाहु: सचिवैर्बुद्धिमत्तरै:॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से समुद्र के किनारे पहुँचकर पाण्डवपुत्र सहदेव ने अपनी सेना का पड़ाव डाला। भरत! तत्पश्चात् महाबाहु सहदेव अपने सचिवों के साथ, जो अत्यन्त बुद्धिमान् परामर्श देने में कुशल थे, बैठकर बहुत देर तक विचार करते रहे।
 
From there, reaching the seashore, Pandava's son Sahadeva camped his army. Bhaarat! Thereafter, Mahabahu Sahadeva sat with his secretaries who were skilled in giving very wise advice and deliberated for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)