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mahabharat 2.31.75-76h: उसने अपने साथ नाना प्रकार के बहुमूल्य रत्न, चंदन, अगुरु की लकड़ी, दिव्य आभूषण, बहुमूल्य वस्त्र तथा विशेष रूप से बहुमूल्य रत्न और रत्न भी भेजे।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 75-76h
 
 
श्लोक  2.31.75-76h 
तत: सम्प्रेषयामास रत्नानि विविधानि च।
चन्दनागुरुकाष्ठानि दिव्यान्याभरणानि च॥ ७५॥
वासांसि च महार्हाणि मणींश्चैव महाधनान्।
 
 
अनुवाद
उसने अपने साथ नाना प्रकार के बहुमूल्य रत्न, चंदन, अगुरु की लकड़ी, दिव्य आभूषण, बहुमूल्य वस्त्र तथा विशेष रूप से बहुमूल्य रत्न और रत्न भी भेजे।
 
He also sent with him various kinds of precious stones, sandalwood, aguru wood, divine ornaments, costly clothes and especially precious precious gems and precious stones. 75 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)