श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 51h
 
 
श्लोक  2.31.51h 
सहदेव उवाच
यज्ञविघ्नमिमं कर्तुं नार्हस्त्वं हव्यवाहन।
 
 
अनुवाद
सहदेव ने कहा - हव्यवाहन ! आपको यज्ञ में यह विघ्न उत्पन्न नहीं करना चाहिए ॥50 1/2॥
 
Sahadev said – Havyavahan! You should not create this disturbance in the Yagya. 50 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)