श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.31.49 
एवं स्तुतोऽसि भगवन् प्रीतेन शुचिना मया।
तुष्टिं पुष्टिं श्रुतिं चैव प्रीतिं चाग्ने प्रयच्छ मे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैंने इस प्रकार अपने को पवित्र करके प्रेमपूर्वक आपकी स्तुति की है। हे अग्निदेव! मुझे संतोष, बल, श्रवण शक्ति, शास्त्र ज्ञान और प्रेम प्रदान कीजिए॥ 49॥
 
O Lord! I have sanctified myself and praised you with love in this manner. O Agnidev! Please grant me satisfaction, strength, hearing power, knowledge of scriptures and love.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)