श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.31.45 
अग्निर्ददातु मे तेजो वायु: प्राणं ददातु मे।
पृथिवी बलमादध्याच्छिवं चापो दिशन्तु मे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे अग्नि, मुझे तेज दो, हे वायु, मुझे प्राण दो, हे पृथ्वी, मुझे बल दो और हे जल, मुझे कल्याण दो ॥ 45॥
 
O Agni, give me brightness, O Vayu, give me life-force, O Earth, give me strength and O Water, give me well-being. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)