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mahabharat 2.31.36: हे राजन! तब से जब भी कोई राजा अज्ञानवश बलपूर्वक नगर पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न करता, अग्निदेव उसे भस्म कर देते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.31.36 
तत: प्रभृति ये केचिदज्ञानात् तां पुरीं नृपा:।
जिगीषन्ति बलाद् राजंस्ते दह्यन्ते स्म वह्निना॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तब से जब भी कोई राजा अज्ञानवश बलपूर्वक नगर पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न करता, अग्निदेव उसे भस्म कर देते थे।
 
O King! Since then, whenever any king tried to conquer the city by force due to ignorance, Agnidev used to burn him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)