Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.31.33-34: फिर जब विवाह का उचित समय आया, तो राजा ने ब्राह्मण का वेश धारण करके अग्निदेव को कन्या अर्पित की और उनके चरणों में सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया। राजा नील की सुन्दर कन्या को पत्नी रूप में स्वीकार करके भगवान अग्नि ने राजा पर अपनी कृपा दृष्टि डाली। 33-34.   |   mahabharat अध्याय 2.31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  2.31.33-34 
तत: कालेन तां कन्यां तथैव हि तदा नृप:।
प्रददौ विप्ररूपाय वह्नये शिरसा नत:॥ ३३॥
प्रतिगृह्य च तां सुभ्रूं नीलराज्ञ: सुतां तदा।
चक्रे प्रसादं भगवांस्तस्य राज्ञो विभावसु:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
फिर जब विवाह का उचित समय आया, तो राजा ने ब्राह्मण का वेश धारण करके अग्निदेव को कन्या अर्पित की और उनके चरणों में सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया। राजा नील की सुन्दर कन्या को पत्नी रूप में स्वीकार करके भगवान अग्नि ने राजा पर अपनी कृपा दृष्टि डाली। 33-34.
 
Then when the right time for marriage arrived, the king offered the girl to Agnidev in the guise of a Brahmin and bowed his head at his feet and saluted him. By accepting the beautiful daughter of King Neel as his wife, Lord Agni showed his blessings on the king. 33-34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)