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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय
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श्लोक 26
श्लोक
2.31.26
जनमेजय उवाच
किमर्थं भगवान् वह्नि: प्रत्यमित्रोऽभवद् युधि।
सहदेवस्य यज्ञार्थं घटमानस्य वै द्विज॥ २६॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन् ! सहदेव तो यज्ञ के लिए ही प्रयत्न कर रहे थे, फिर भगवान अग्निदेव उस युद्ध में उनके विरोधी कैसे हो गये ? 26॥
Janamejaya asked – Brahmin! Sahadev was trying only for the Yagya, then how did Lord Agnidev become his opponent in that war? 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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