श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  2.31.12-13 
स विजित्य दुराधर्षं भीष्मकं माद्रिनन्दन:।
कोसलाधिपतिं चैव तथा वेणातटाधिपम्॥ १२॥
कान्तारकांश्च समरे तथा प्राक्‍कोसलान् नृपान्।
नाटकेयांश्च समरे तथा हेरम्बकान् युधि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
माद्रीनन्दन ने उस युद्ध में वीर एवं पराक्रमी भीष्मक को परास्त किया तथा कोसल के राजा, वेन नदी के तटवर्ती प्रदेशों के स्वामी, कान्तारक तथा पूर्वकोसल के राजाओं को भी परास्त किया। तत्पश्चात् नटकायों और हेरम्बकों को भी युद्ध में परास्त किया। 12-13॥
 
Madrinandan defeated the brave and brave Bhishmak in that battle and also defeated the ruler of Kosala, the lord of the regions on the banks of river Venana, Kantaraka and the kings of Purvakosala. After that, Natakayas and Herambakas were also defeated in the war. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)