vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 31: सहदेवके द्वारा दक्षिण दिशाकी विजय
»
श्लोक 1
श्लोक
2.31.1
वैशम्पायन उवाच
तथैव सहदेवोऽपि धर्मराजेन पूजित:।
महत्या सेनया राजन् प्रययौ दक्षिणां दिशम्॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! सहदेव भी धर्मराज युधिष्ठिर से सम्मानित होकर विशाल सेना लेकर दक्षिण दिशा की विजय के लिए चल पड़े।
Vaishmpayana says - Janamejaya! Sahadeva too, being honoured by Dharmaraja Yudhishthira, set out with a huge army to conquer the southern direction.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×