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mahabharat 2.30.6-7h: पाण्डुपुत्र पराक्रमी भीमसेन, जो बलवानों में श्रेष्ठ थे और जिन्होंने महान पराक्रम दिखाया, उन्होंने काशीराज सुबाहु को, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते थे, बलपूर्वक परास्त किया।   |   mahabharat अध्याय 2.30: भीमका पूर्व दिशाके अनेक देशों तथा राजाओंको जीतकर भारी धन-सम्पत्तिके साथ इन्द्रप्रस्थमें लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 30: भीमका पूर्व दिशाके अनेक देशों तथा राजाओंको जीतकर भारी धन-सम्पत्तिके साथ इन्द्रप्रस्थमें लौटना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  2.30.6-7h 
पाण्डव: सुमहावीर्यो बलेन बलिनां वर:।
स काशिराजं समरे सुबाहुमनिवर्तिनम्॥ ६॥
वशे चक्रे महाबाहुर्भीमो भीमपराक्रम:।
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र पराक्रमी भीमसेन, जो बलवानों में श्रेष्ठ थे और जिन्होंने महान पराक्रम दिखाया, उन्होंने काशीराज सुबाहु को, जो युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते थे, बलपूर्वक परास्त किया।
 
The mighty Bhimasena, the son of Pandu, who was the best amongst the strong and displayed tremendous bravery, forcefully defeated the King of Kashi, Subahu, who never showed his back in the battle. 6 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)