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mahabharat 2.3.d1: 'कुन्तीकुमार धनंजय! मैं तुम्हारे लिए एक दिव्य सभाभवन का निर्माण करूँगा जो तीनों लोकों में विख्यात होगा। वह समस्त प्राणियों को विस्मित कर देगा तथा तुम्हारे तथा समस्त पाण्डवों के सुख में वृद्धि करेगा।'   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.3.d1 
(विश्रुतां त्रिषु लोकेषु पार्थ दिव्यां सभां तव।
प्राणिनां विस्मयकरीं तव प्रीतिविवर्धिनीम्।
पाण्डवानां च सर्वेषां करिष्यामि धनंजय॥)
 
 
अनुवाद
'कुन्तीकुमार धनंजय! मैं तुम्हारे लिए एक दिव्य सभाभवन का निर्माण करूँगा जो तीनों लोकों में विख्यात होगा। वह समस्त प्राणियों को विस्मित कर देगा तथा तुम्हारे तथा समस्त पाण्डवों के सुख में वृद्धि करेगा।'
 
‘Kuntikumar Dhananjay! I will build a divine assembly hall for you which will be famous in all the three worlds. It will amaze all the creatures and will increase the happiness of you as well as all the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)