श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.3.8 
वारुणश्च महाशङ्खो देवदत्त: सुघोषवान्।
सर्वमेतत् प्रदास्यामि भवते नात्र संशय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘वरुणदेव का देवदत्त नामक एक महान शंख भी है, जो अत्यन्त भयंकर ध्वनि करता है। मैं ये सब वस्तुएँ लाकर तुम्हें भेंट करूँगा, इसमें संशय नहीं है।’॥8॥
 
‘There is also a great conch named Devadatta of Varundev, which makes a very loud sound. I will bring all these things and present them to you, there is no doubt about it.’॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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