श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.3.5 
मन:प्रह्लादिनीं चित्रां सर्वरत्नविभूषिताम्।
अस्ति बिन्दुसरस्युग्रा गदा च कुरुनन्दन॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'जो सब प्रकार के रत्नों से विभूषित होगा, विचित्र होगा और मन को आनन्द देने वाला होगा। कुरुनन्दन! बिन्दुसार के पास भयंकर गदा भी है। 5॥
 
'Which will be adorned with all types of gems, strange and will give joy to the mind. Kurunandan! Bindusara also has a fierce mace. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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