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mahabharat 2.3.4: 'भरत! यदि वह अभी भी वहाँ है, तो मैं उसे वापस ले आऊँगा। फिर उसके साथ मिलकर मैं एक ऐसी सभा तैयार करूँगा जो पांडवपुत्र युधिष्ठिर की कीर्ति बढ़ाएगी।'   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.3.4 
आगमिष्यामि तद् गृह्य यदि तिष्ठति भारत।
तत: सभां करिष्यामि पाण्डवस्य यशस्विनीम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'भरत! यदि वह अभी भी वहाँ है, तो मैं उसे वापस ले आऊँगा। फिर उसके साथ मिलकर मैं एक ऐसी सभा तैयार करूँगा जो पांडवपुत्र युधिष्ठिर की कीर्ति बढ़ाएगी।'
 
'Bharat! If he is still there, I will bring him back. Then with him I will prepare a gathering that will enhance the glory of Pandava's son Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)