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mahabharat 2.3.34: उस सभा भवन के चारों ओर कई बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे, जो हमेशा फूलों से लदे रहते थे। उनकी छाया बहुत ठंडी थी। वे सुंदर पेड़ हमेशा हवा के झोंकों में झूमते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.3.34 
तां सभामभितो नित्यं पुष्पवन्तो महाद्रुमा:।
आसन् नानाविधा लोला: शीतच्छाया मनोरमा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस सभा भवन के चारों ओर कई बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे, जो हमेशा फूलों से लदे रहते थे। उनकी छाया बहुत ठंडी थी। वे सुंदर पेड़ हमेशा हवा के झोंकों में झूमते रहते थे।
 
There were many big trees growing all around that assembly hall, which were always full of flowers. Their shade was very cool. Those beautiful trees were always swaying in the gusts of wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)