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mahabharat 2.3.33: क्योंकि वह नदी बहुमूल्य रत्नों और रत्नों से भरी हुई थी, इसलिए कुछ राजाओं ने नदी के पास आकर उसे देखकर भी उसकी वास्तविकता पर विश्वास नहीं किया और उसे भूमि समझकर भूलवश उसमें गिर पड़े॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.3.33 
मणिरत्नचितां तां तु केचिदभ्येत्य पार्थिवा:।
दृष्ट्वापि नाभ्यजानन्त तेऽज्ञानात् प्रपतन्त्युत॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि वह नदी बहुमूल्य रत्नों और रत्नों से भरी हुई थी, इसलिए कुछ राजाओं ने नदी के पास आकर उसे देखकर भी उसकी वास्तविकता पर विश्वास नहीं किया और उसे भूमि समझकर भूलवश उसमें गिर पड़े॥ 33॥
 
Because it was filled with precious stones and jewels, some kings, even after coming to the river and seeing it, did not believe in its reality and mistakenly fell into it thinking it to be land.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)