श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.3.30 
तस्यां सभायां नलिनीं चकाराप्रतिमां मय:।
वैदूर्यपत्रविततां मणिनालमयाम्बुजाम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मायासुर ने उस सभाभवन के भीतर एक अत्यंत सुंदर तालाब बनवाया था, जिसकी कोई तुलना नहीं थी। उसमें नीलम रत्नजड़ित कमल के पत्ते बिछाए हुए थे। उन कमल पुष्पों के तने रत्नों से बने थे।
 
Mayasura had built a very beautiful pond inside that assembly hall, which had no comparison. In it were spread lotus leaves studded with sapphire gems. The stems of those lotus flowers were made of gems.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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