Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.3.29: वे राक्षस भयानक रूप वाले थे, आकाश में विचरण करते थे, विशाल और अत्यंत शक्तिशाली थे। उनकी आँखें लाल और गुलाबी रंग की थीं और उनके कान सीपियों जैसे थे। वे सभी आक्रमण करने में कुशल थे।   |   mahabharat अध्याय 2.3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.3.29 
अन्तरिक्षचरा घोरा महाकाया महाबला:।
रक्ताक्षा: पिङ्गलाक्षाश्च शुक्तिकर्णा: प्रहारिण:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे राक्षस भयानक रूप वाले थे, आकाश में विचरण करते थे, विशाल और अत्यंत शक्तिशाली थे। उनकी आँखें लाल और गुलाबी रंग की थीं और उनके कान सीपियों जैसे थे। वे सभी आक्रमण करने में कुशल थे।
 
Those demons were terrifying in appearance, roamed in the sky, were huge and very powerful. Their eyes were red and pink in colour and their ears looked like shells. All of them were skilled in attacking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)