श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.3.27 
न दाशार्ही सुधर्मा वा ब्रह्मणो वाथ तादृशी।
सभा रूपेण सम्पन्ना यां चक्रे मतिमान् मय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान मय द्वारा निर्मित सभा सुन्दर यादवों की सभा अथवा भगवान ब्रह्मा की सभा के समान भी नहीं थी।
 
The assembly built by the wise Maya was not like the assembly of the beautiful Yadavas or even the assembly of Lord Brahma. 27.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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