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श्लोक 2.3.27  |
न दाशार्ही सुधर्मा वा ब्रह्मणो वाथ तादृशी।
सभा रूपेण सम्पन्ना यां चक्रे मतिमान् मय:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| बुद्धिमान मय द्वारा निर्मित सभा सुन्दर यादवों की सभा अथवा भगवान ब्रह्मा की सभा के समान भी नहीं थी। |
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| The assembly built by the wise Maya was not like the assembly of the beautiful Yadavas or even the assembly of Lord Brahma. 27. |
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