श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.3.22 
यस्य शङ्खस्य नादेन भूतानि प्रचकम्पिरे।
सभा च सा महाराज शातकुम्भमयद्रुमा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस शंख की ध्वनि सुनकर सभी प्राणी काँप उठे। महाराज! उस सभा में स्वर्णमय वृक्ष शोभायमान थे।
 
All creatures trembled on hearing the sound of that conch. Maharaj! Golden trees looked beautiful in that assembly. 22.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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