श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  2.3.10-11h 
हिरण्यशृङ्ग: सुमहान् महामणिमयो गिरि:।
रम्यं बिन्दुसरो नाम यत्र राजा भगीरथ:॥ १०॥
द्रष्टुं भागीरथीं गङ्गामुवास बहुला: समा:।
 
 
अनुवाद
'हिरण्यश्रृंग नामक रत्नों से निर्मित एक विशाल पर्वत है, जहाँ बिन्दुसर नामक एक सुन्दर तीर्थ है। राजा भगीरथ ने भागीरथी गंगा के दर्शन हेतु वहाँ अनेक वर्षों तक तपस्या की थी।'
 
‘There is a huge mountain made of gems called Hiranyasringa, where there is a beautiful pilgrimage place called Bindusar. King Bhagirath lived there for many years (performing penance) to have a glimpse of Bhagirathi Ganga. 10 1/2.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd