श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 3: मयासुरका भीमसेन और अर्जुनको गदा और शंख लाकर देना तथा उसके द्वारा अद्‍भुत सभाका निर्माण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.3.1 
वैशम्पायन उवाच
अथाब्रवीन्मय: पार्थमर्जुनं जयतां वरम्।
आपृच्छे त्वां गमिष्यामि पुनरेष्यामि चाप्यहम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तत्पश्चात् मयासुर ने विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन से कहा - 'भरत! मैं आपकी अनुमति चाहता हूँ। मैं एक स्थान पर जाकर शीघ्र ही लौट आऊँगा।॥1॥
 
Vaishampayana says - O Janamejaya! Thereafter Mayasura said to Arjuna, the best of the victorious warriors - 'Bharata! I want your permission. I will go to one place and then return soon.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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