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mahabharat 2.28.d56-7: उन सबको जीतकर और उन पर कर लगाकर अर्जुन वहाँ से रत्न, स्वर्ण, मूंगा, बहुमूल्य रत्न और आभूषण लेकर श्रृंगवन पर्वत पर गए। वहाँ से पांडव पक्षासनपुत्र अर्जुन उत्तर कुरुवर्ष पहुँचे और उस देश को जीतने का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d56-7
 
 
श्लोक  2.28.d56-7 
अथ जित्वा समस्तांस्तान् करे च विनिवेश्य च॥
मणिहेमप्रवालानि रत्नान्याभरणानि च।
एतानि लब्ध्वा पार्थोऽपि शृङ्गवन्तं गिरिं ययौ॥
शृङ्गवन्तं च कौन्तेय: समतिक्रम्य फाल्गुन:॥)
उत्तरं कुरुवर्षं तु स समासाद्य पाण्डव:।
इयेष जेतुं तं देशं पाकशासननन्दन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन सबको जीतकर और उन पर कर लगाकर अर्जुन वहाँ से रत्न, स्वर्ण, मूंगा, बहुमूल्य रत्न और आभूषण लेकर श्रृंगवन पर्वत पर गए। वहाँ से पांडव पक्षासनपुत्र अर्जुन उत्तर कुरुवर्ष पहुँचे और उस देश को जीतने का विचार किया।
 
After conquering them all and imposing taxes on them, Arjuna took gems, gold, corals, precious stones and ornaments from there and went to Shringavan mountain. From there, Arjuna, the son of Paksasana, the Pandava, reached Uttara Kuruvarsha and thought of conquering that country.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)