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mahabharat 2.28.d48: महाराज! वहाँ पहुँचकर वे उस देश के सुन्दर प्रदेशों में विचरण करने लगे। बड़े-बड़े महलों की पंक्तियों में विचरण करते हुए श्वेत अश्व अर्जुन तारों के बीच चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d48
 
 
श्लोक  2.28.d48 
स तु देशेषु रम्येषु गन्तुं तत्रोपचक्रमे॥
मध्ये प्रासादवृन्देषु नक्षत्राणां शशी यथा।
 
 
अनुवाद
महाराज! वहाँ पहुँचकर वे उस देश के सुन्दर प्रदेशों में विचरण करने लगे। बड़े-बड़े महलों की पंक्तियों में विचरण करते हुए श्वेत अश्व अर्जुन तारों के बीच चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा था।
 
Maharaj! After reaching there, he started roaming in the beautiful regions of that country. While roaming in the rows of big palaces, the white horse Arjuna looked beautiful like the moon among the stars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)