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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d40-d41
 
 
श्लोक  2.28.d40-d41 
तत्रामरोपमान् रम्यान् पुरुषान् सुखसंयुतान्॥
जित्वा तान् स्ववशे कृत्वा करे च विनिवेश्य च।
आहृत्य सर्वरत्नानि असंख्यानि ततस्तत:॥
नीलं नाम गिरिं गत्वा तत्रस्थानजयत् प्रभु:।
 
 
अनुवाद
उस देश में देवताओं के समान सुन्दर और सुखी पुरुष रहते थे। अर्जुन ने उन सभी को जीतकर अपने अधीन कर लिया और उन पर कर लगा दिया। इस प्रकार, इधर-उधर से असंख्य रत्न एकत्रित करके, पराक्रमी अर्जुन नीलगिरि पहुँचे और वहाँ के निवासियों को परास्त किया।
 
In that country lived beautiful and happy men like gods. Arjuna conquered them all and brought them under his control and imposed taxes on them. Thus, having collected innumerable gems from here and there, the powerful Arjuna travelled to Nilgiri and defeated the inhabitants there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)