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mahabharat 2.28.d35: राजन! उस वर्ष को जीतकर अर्जुन ने उसे करदाता बना लिया और वहाँ से दुर्लभ रत्न लेकर मध्य इलावृत वर्ष में लौट आये।   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d35
 
 
श्लोक  2.28.d35 
तं जित्वा चार्जुनो राजन् करे च विनिवेश्य च।
आहृत्य तत्र रत्नानि दुर्लभानि तथार्जुन:॥
पुनश्च परिवृत्याथ मध्यं देशमिलावृतम्।
 
 
अनुवाद
राजन! उस वर्ष को जीतकर अर्जुन ने उसे करदाता बना लिया और वहाँ से दुर्लभ रत्न लेकर मध्य इलावृत वर्ष में लौट आये।
 
King! After conquering that year, Arjun made him a tax payer and taking rare gems from there, he returned to the central Ilavrita year.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)