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mahabharat 2.28.d28: उसके दोनों तटों पर सुनहरे और चमकते हुए फानूस लगे हुए थे, जो जम्बूद्वीप को अत्यंत शोभायमान बना रहे थे। हे राजन! ऐसी अभूतपूर्व नदी को देखकर अर्जुन ने उसकी बहुत प्रशंसा की और वे मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d28
 
 
श्लोक  2.28.d28 
दीप्तैर्हेमवितानैश्च समन्ताच्छोभितां शुभाम्।
तथाविधां नदीं दृष्ट्वा पार्थस्तां प्रशशंस ह॥
अदृष्टपूर्वां राजेन्द्र दृष्ट्वा हर्षमवाप च।
 
 
अनुवाद
उसके दोनों तटों पर सुनहरे और चमकते हुए फानूस लगे हुए थे, जो जम्बूद्वीप को अत्यंत शोभायमान बना रहे थे। हे राजन! ऐसी अभूतपूर्व नदी को देखकर अर्जुन ने उसकी बहुत प्रशंसा की और वे मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए।
 
There were golden and shining chandeliers on both its banks, which were making the Jambudweed look very beautiful. O King! After seeing such an unprecedented river, Arjun praised it a lot and he was very happy in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)