श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक d16-d17
 
 
श्लोक  2.28.d16-d17 
मेरोरिलावृतं वर्षं सर्वत: परिमण्डलम्॥
मेरोस्तु दक्षिणे पार्श्वे जम्बूर्नाम वनस्पति:।
नित्यपुष्पफलोपेत: सिद्धचारणसेवित:॥
 
 
अनुवाद
मेरु के चारों ओर गोलाकार इलावृतवर्ष है। मेरु के दक्षिण में जम्बू नामक वृक्ष है, जो सदैव फल-फूलों से भरा रहता है। सिद्ध और चारण उस वृक्ष का सेवन करते हैं।
 
Around Meru is the circular Ilavritavarsha. On the southern side of Meru there is a tree named Jambu, which is always full of fruits and flowers. Siddhas and Charans consume that tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)