पार्थ ने घोड़ों सहित सारा धन धर्मराज को सौंप दिया और उनकी अनुमति लेकर महल में वापस चले गए।
Partha handed over all the wealth, including the horses, to Dharmaraja and, taking his permission, went back to the palace.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि दिग्विजयपर्वणि अर्जुनोत्तरदिग्विजये अष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत दिग्विजयपर्वमें अर्जुनकी उत्तर दिशापर विजयविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५८ श्लोक मिलाकर कुल ७९ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)