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mahabharat 2.28.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् पराक्रमी पाण्डव अर्जुन धवलगिरि को पार करके द्रुम्पुत्र द्वारा रक्षित किंपुरुष देश में गए, जहाँ किन्नर लोग रहते थे। वहाँ उन्होंने क्षत्रियों के विनाश सहित घोर युद्ध करके उस देश को जीत लिया और इस शर्त पर कि राजा कर देते रहेंगे, उन्हें पुनः राज्य पर आसीन कर दिया।॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 2.28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 28: किम्पुरुष, हाटक तथा उत्तरकुरुपर विजय प्राप्त करके अर्जुनका इन्द्रप्रस्थ लौटना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  2.28.1-2 
वैशम्पायन उवाच
स श्वेतपर्वतं वीर: समतिक्रम्य वीर्यवान्।
देशं किम्पुरुषावासं द्रुमपुत्रेण रक्षितम्॥ १॥
महता संनिपातेन क्षत्रियान्तकरेण ह।
अजयत् पाण्डवश्रेष्ठ: करे चैनं न्यवेशयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् पराक्रमी पाण्डव अर्जुन धवलगिरि को पार करके द्रुम्पुत्र द्वारा रक्षित किंपुरुष देश में गए, जहाँ किन्नर लोग रहते थे। वहाँ उन्होंने क्षत्रियों के विनाश सहित घोर युद्ध करके उस देश को जीत लिया और इस शर्त पर कि राजा कर देते रहेंगे, उन्हें पुनः राज्य पर आसीन कर दिया।॥1-2॥
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Thereafter the valiant Pandava Arjuna crossed Dhavalgiri and went to the Kimpurush country protected by Drumputra, where the Kinnars lived. There he conquered that country after a huge battle in which the Kshatriyas were destroyed and on the condition that the king would continue to pay taxes, he reinstated him on his kingdom.॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)