Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.27.6: वे युद्ध के वाद्यों की ध्वनि, उत्तम नगाड़ों की ध्वनि, रथ के पहियों की गड़गड़ाहट और हाथियों की गर्जना से पृथ्वी को हिलाते हुए आगे बढ़ रहे थे। | mahabharat अध्याय 2.27: अर्जुनका अनेक पर्वतीय देशोंपर विजय पाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृदङ्गवरनादेन रथनेमिस्वनेन च।
हस्तिनां च निनादेन कम्पयन् वसुधामिमाम्॥ ६॥
अनुवाद
वे युद्ध के वाद्यों की ध्वनि, उत्तम नगाड़ों की ध्वनि, रथ के पहियों की गड़गड़ाहट और हाथियों की गर्जना से पृथ्वी को हिलाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
They were advancing, shaking the earth with the sound of warlike musical instruments, the sound of excellent drums, the rattling of chariot wheels and the roaring of elephants.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥