श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनका अनेक पर्वतीय देशोंपर विजय पाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.27.18 
ततस्त्रिगर्ता: कौन्तेयं दार्वा: कोकनदास्तथा।
क्षत्रिया बहवो राजन्नुपावर्तन्त सर्वश:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर त्रिगर्त, दार्वा और कोकनाद आदि बहुत से क्षत्रिय योद्धा सब ओर से कुन्तीनन्दन अर्जुन की शरण लेने आये ॥18॥
 
Thereafter, many Kshatriya warriors like Trigarta, Darva and Kokanad etc. came to seek shelter from Kuntinandan Arjuna from all sides. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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