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mahabharat 2.26.7: हे जनमेजय, भरतवंशी रत्न, अर्जुन ने उन महान धनुर्धरों को भी परास्त कर दिया और उन्हें साथ लेकर प्राग्ज्योतिषपुर पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.26: अर्जुनके द्वारा अनेक देशों, राजाओं तथा भगदत्तकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 26: अर्जुनके द्वारा अनेक देशों, राजाओं तथा भगदत्तकी पराजय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.26.7 
स तानपि महेष्वासान् विजिग्ये भरतर्षभ।
तैरेव सहित: सर्वै: प्राग्ज्योतिषमुपाद्रवत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय, भरतवंशी रत्न, अर्जुन ने उन महान धनुर्धरों को भी परास्त कर दिया और उन्हें साथ लेकर प्राग्ज्योतिषपुर पर आक्रमण कर दिया।
 
O Janamejaya, the jewel of the Bharat clan, Arjuna defeated those great archers as well and taking them along with him attacked Pragjyotishpur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)