Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.26.14-15: अर्जुन बोले, "महाराज! धर्म के ज्ञाता और सत्यवादी कुरुकुलपुत्र राजा युधिष्ठिर बहुत-सी दक्षिणा देकर राजसूय यज्ञ करने जा रहे हैं। मैं चाहता हूँ कि वे विश्व के सम्राट बनें। आप उन्हें यह दान दें। आप मेरे पिता के मित्र हैं और मुझसे प्रेम भी करते हैं; इसलिए मैं आपको आदेश नहीं दे सकता। आप उन्हें प्रेमपूर्वक ही यह दान दें।" 14-15. | mahabharat अध्याय 2.26: अर्जुनके द्वारा अनेक देशों, राजाओं तथा भगदत्तकी पराजय । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुन बोले, "महाराज! धर्म के ज्ञाता और सत्यवादी कुरुकुलपुत्र राजा युधिष्ठिर बहुत-सी दक्षिणा देकर राजसूय यज्ञ करने जा रहे हैं। मैं चाहता हूँ कि वे विश्व के सम्राट बनें। आप उन्हें यह दान दें। आप मेरे पिता के मित्र हैं और मुझसे प्रेम भी करते हैं; इसलिए मैं आपको आदेश नहीं दे सकता। आप उन्हें प्रेमपूर्वक ही यह दान दें।" 14-15.
Arjun said, "Maharaj! King Yudhishthira, the son of the Kurukula, who is knowledgeable about Dharma and truthful, is going to perform the Rajasuya Yagna by giving a lot of Dakshina. I want him to become the emperor of the world. You should give him the gift. You are my father's friend and you love me too; therefore, I cannot order you. You should give him the gift with love only." 14-15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥