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mahabharat 2.26.12: मैं देवराज इन्द्र का मित्र हूँ और युद्ध में उनसे किसी भी प्रकार कम नहीं हूँ, पुत्र! फिर भी मैं युद्ध में तुम्हारे सामने टिक नहीं सकूँगा॥12॥   |   mahabharat अध्याय 2.26: अर्जुनके द्वारा अनेक देशों, राजाओं तथा भगदत्तकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 26: अर्जुनके द्वारा अनेक देशों, राजाओं तथा भगदत्तकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.26.12 
अहं सखा महेन्द्रस्य शक्रादनवरो रणे।
न शक्ष्यामि च ते तात स्थातुं प्रमुखतो युधि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं देवराज इन्द्र का मित्र हूँ और युद्ध में उनसे किसी भी प्रकार कम नहीं हूँ, पुत्र! फिर भी मैं युद्ध में तुम्हारे सामने टिक नहीं सकूँगा॥12॥
 
"I am a friend of Devraja Indra and am in no way inferior to him in battle, son! Even then I will not be able to stand before you in battle.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)