श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  2.25.d9 
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा व्यासवचो हृष्टास्तमूचु: पाण्डुनन्दना:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! व्यासजी की यह बात सुनकर पाण्डवों ने बड़े हर्ष से कहा।
 
Vaishmpayana says- Janamejaya! On hearing this from Vyasa, the Pandavas said with great joy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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