| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा » श्लोक d6 |
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| | | | श्लोक 2.25.d6  | तस्माद् दिशं देवगुप्तामुदीचीं गच्छ फाल्गुन।
शक्तो भवान् सुराञ्जित्वा रत्नान्याहर्तुमोजसा॥ | | | | | | अनुवाद | | अतः हे अर्जुन, तुम देवताओं द्वारा सुरक्षित उत्तर दिशा की ओर यात्रा करो, क्योंकि केवल तुम ही देवताओं को परास्त करने तथा बलपूर्वक वहाँ से रत्न लाने में समर्थ हो। | | | | Therefore Arjuna, you should travel to the north direction protected by the Gods because only you are capable of defeating the Gods and bringing the gems from there by force. | |
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