Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.25.d2: व्यास बोले, "कुंतीनंदन! मैं तुम्हें बार-बार बधाई देता हूँ। सौभाग्य से तुम्हारे मन में ऐसा संकल्प आया है। तुम अकेले ही सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्साहित हो।" | mahabharat अध्याय 2.25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
साधु साध्विति कौन्तेय दिष्टॺा ते बुद्धिरीदृशी।
पृथिवीमखिलां जेतुमेकोऽध्यवसितो भवान्॥
अनुवाद
व्यास बोले, "कुंतीनंदन! मैं तुम्हें बार-बार बधाई देता हूँ। सौभाग्य से तुम्हारे मन में ऐसा संकल्प आया है। तुम अकेले ही सम्पूर्ण पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने के लिए उत्साहित हो।"
Vyasa said- Kunti Nandan! I congratulate you again and again. Fortunately, such a resolution has come in your mind. You are excited to conquer the whole earth single-handedly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥