श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा  »  श्लोक d10h
 
 
श्लोक  2.25.d10h 
पाण्डवा ऊचु:
एवमस्तु मुनिश्रेष्ठ यथाऽऽज्ञापयसि प्रभो।)
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने कहा, "हे महामुनि! आपकी जैसी आज्ञा हो, वैसा ही हो।"
 
The Pandavas said, "O great sage! Let it be as you command."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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