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mahabharat 2.25.7-9h: ऐसा आदेश देकर कुन्तीपुत्र अर्जुन, अद्भुत कर्मयोगी अग्निदेव द्वारा प्रदत्त दिव्य रथ पर सवार होकर विशाल सेना के साथ वहाँ से चल पड़े। इसी प्रकार भीमसेन तथा पुरुषश्रेष्ठ नकुल और सहदेव, ये सभी भाई, धर्मराज द्वारा सम्मानित होकर अपनी सेनाओं के साथ दिग्विजय के लिए चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 2.25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन आदि चारों भाइयोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा  »  श्लोक 7-9h
 
 
श्लोक  2.25.7-9h 
इत्युक्त: प्रययौ पार्थ: सैन्येन महताऽऽवृत:॥ ७॥
अग्निदत्तेन दिव्येन रथेनाद्‍भुतकर्मणा।
तथैव भीमसेनोऽपि यमौ च पुरुषर्षभौ॥ ८॥
ससैन्या: प्रययु: सर्वे धर्मराजेन पूजिता:।
 
 
अनुवाद
ऐसा आदेश देकर कुन्तीपुत्र अर्जुन, अद्भुत कर्मयोगी अग्निदेव द्वारा प्रदत्त दिव्य रथ पर सवार होकर विशाल सेना के साथ वहाँ से चल पड़े। इसी प्रकार भीमसेन तथा पुरुषश्रेष्ठ नकुल और सहदेव, ये सभी भाई, धर्मराज द्वारा सम्मानित होकर अपनी सेनाओं के साथ दिग्विजय के लिए चल पड़े।
 
On giving such orders, Kunti's son Arjun set out from there with a huge army in the divine chariot given by Agni to the wonderful Karma. Similarly, Bhimsen and the best of men, Nakul and Sahadeva, all these brothers, having been honored by the king of Dharma, set out with their armies for Digvijay. 7-8 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)