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श्लोक 2.25.11  |
खाण्डवप्रस्थमध्यस्थो धर्मराजो युधिष्ठिर:।
आसीत् परमया लक्ष्म्या सुहृद्गणवृत: प्रभु:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| केवल धर्मराज युधिष्ठिर ही अपनी सुन्दर रानी लक्ष्मी के साथ अपने मित्रों से घिरे हुए खाण्डवप्रस्थ में रह गये ॥11॥ |
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| Only Dharmaraja Yudhishthir remained in Khandavaprastha with his beautiful queen Lakshmi, surrounded by his friends. 11॥ |
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इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि दिग्विजयपर्वणि दिग्विजयसंक्षेपकथने पञ्चविंशोऽध्याय:॥ २५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत दिग्विजयपर्वमें दिग्विजयका संक्षिप्त वर्णनविषयक पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ९ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २० १/२ श्लोक हैं) |
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