Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.24.d6-d8: तब दोनों टुकड़े पुनः जुड़ गए और महाबली जरासंध भीम से युद्ध करने लगा। उन दोनों वीरों का वह युद्ध अत्यंत भयंकर एवं रोमांचकारी था। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समस्त संसार नष्ट हो जाएगा। वह द्वंद्व समस्त जीवों में भय बढ़ा रहा था। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने पुनः एक सरकंडा लिया और पहले की भाँति उसके दो टुकड़े कर दिए और दोनों टुकड़ों को अलग-अलग विपरीत दिशाओं में फेंक दिया। यह जरासंध के वध का दूसरा संकेत था। | mahabharat अध्याय 2.24: भीमके द्वारा जरासंधका वध, बंदी राजाओंकी मुक्ति, श्रीकृष्ण आदिका भेंट लेकर इन्द्रप्रस्थमें आना और वहाँसे श्रीकृष्णका द्वारका जाना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब दोनों टुकड़े पुनः जुड़ गए और महाबली जरासंध भीम से युद्ध करने लगा। उन दोनों वीरों का वह युद्ध अत्यंत भयंकर एवं रोमांचकारी था। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समस्त संसार नष्ट हो जाएगा। वह द्वंद्व समस्त जीवों में भय बढ़ा रहा था। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने पुनः एक सरकंडा लिया और पहले की भाँति उसके दो टुकड़े कर दिए और दोनों टुकड़ों को अलग-अलग विपरीत दिशाओं में फेंक दिया। यह जरासंध के वध का दूसरा संकेत था।
Then both the pieces joined again and the mighty Jarasandha started fighting with Bhima. That fight between those two heroes was very fierce and thrilling. Seeing it, it seemed as if the whole world would be destroyed. That duel was increasing the fear of all living beings. At that time, Lord Krishna again took a reed and tore it into two pieces as before and threw both the pieces separately in opposite directions. This was the second signal for the killing of Jarasandha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥